Kaisi azaadiaan manayein ham
Kaise ghee ke diye jalaein ham
Jazba-e-jaan-faroshi kho baithe
Wo ganwa aaye bhaavnaein ham
Teri qurbaaniaan ganwa baithe
Ham Bhagat Singh talak bhula baithe
Ham siyaasat ke haath bik gaye maa
Tujh ko kis munh ser ye bataayein ham
Apne khatir hi daud-bhaag rahi
Ab kahaan seeno mein wo aag rahi
Aankh nam hoti hai magar ab bhi
Jab taraane wo gungunaaein ham
Ham hain bahu-rashtriya nishaano pe
Fir ghulaami ke hain muhaano pe
Ab to uthna padega ae yaaro
Kaise munh dhaamp ke so jaaein ham
Doodh ki laaj kyun na rakhne chalein,
Aaj fir se vasanti pehne chalein,
Chandrashekhar Subhash banne chalein,
Kyun na fir khud ko aazmaaein ham !
-SATISH BEDAAG
Friday, August 14, 2009
Saturday, July 18, 2009
ग़ज़ल
एक मासूम मुहब्बत पे मचा है घमसान
दूर तक देख समन्दर में उठा है तूफ़ान
एक लड़की थी सिखाती थी जो खिल कर हंसना
आज याद आई तो हो आई है सीली मुस्कान
एक वो मेला वो झूला वो मेरे संग तस्वीर
क्या पता खुश भी कहीं है के नहीं वो नादान
फिर से बचपन हो तेरा शहर हो और छुट्टियां हों
काश मैं फिर रहूँ कुछ रोज़ तेरे घर मेहमान
एक मुंडेर पे इक गाँव में इक नाम लिखा है
रोज़ उस में से ही खुलता है ये नीला असमान
('मैं और बोगनवीलिया' में से)
दूर तक देख समन्दर में उठा है तूफ़ान
एक लड़की थी सिखाती थी जो खिल कर हंसना
आज याद आई तो हो आई है सीली मुस्कान
एक वो मेला वो झूला वो मेरे संग तस्वीर
क्या पता खुश भी कहीं है के नहीं वो नादान
फिर से बचपन हो तेरा शहर हो और छुट्टियां हों
काश मैं फिर रहूँ कुछ रोज़ तेरे घर मेहमान
एक मुंडेर पे इक गाँव में इक नाम लिखा है
रोज़ उस में से ही खुलता है ये नीला असमान
('मैं और बोगनवीलिया' में से)
किताब
वो एक किताब जो हम साथ पढ़ा करते हैं
सिरहाने नीचे वहीं की वहीं मिलेगी तुम्हें
वो ज़िन्दगी जिसे हम साथ जिया करते हैं
तुम्हारे पीछे वहीं की वहीं पड़ी है बंद
जहां से पन्ना मुड़ा देखो खोल लेना तुम
('एक चुटकी चाँदनी' से)
सिरहाने नीचे वहीं की वहीं मिलेगी तुम्हें
वो ज़िन्दगी जिसे हम साथ जिया करते हैं
तुम्हारे पीछे वहीं की वहीं पड़ी है बंद
जहां से पन्ना मुड़ा देखो खोल लेना तुम
('एक चुटकी चाँदनी' से)
ग़ज़ल
रोज़ एल्बम से आ निकलती है
रोज़ तू मुझसे झगड़ा करती है
तेरी यादों की खोल कर एल्बम
रत मेरे सिरहाने रखती है
एक लम्हा बंधा है पल्ले से
जाने कब इसकी गाँठ खुलती है
कभी पुरख्वाब थी जो दिल की ज़मीं
तेरी यादों का पानी भारती है
इक घड़ी तेरे संग सदियों से
बस मुझे मिलती मिलती मिलती है
कितने लम्हे बरसते हैं दिल पर
शाख़-ए-माज़ी कोई लचकती है
तेरी खुश्बू की प्यासी शब, शब भर
मेरे सीने पे सर पटकती है
इतनी गर्मी में तेरी याद मुझे
जैसे शिमला में बर्फ़ गिरती है
('मैं और बोगनवीलिया' में से)
रोज़ तू मुझसे झगड़ा करती है
तेरी यादों की खोल कर एल्बम
रत मेरे सिरहाने रखती है
एक लम्हा बंधा है पल्ले से
जाने कब इसकी गाँठ खुलती है
कभी पुरख्वाब थी जो दिल की ज़मीं
तेरी यादों का पानी भारती है
इक घड़ी तेरे संग सदियों से
बस मुझे मिलती मिलती मिलती है
कितने लम्हे बरसते हैं दिल पर
शाख़-ए-माज़ी कोई लचकती है
तेरी खुश्बू की प्यासी शब, शब भर
मेरे सीने पे सर पटकती है
इतनी गर्मी में तेरी याद मुझे
जैसे शिमला में बर्फ़ गिरती है
('मैं और बोगनवीलिया' में से)
Saturday, July 11, 2009
शायर
एक शायर से आओ मिलवाऊं
जो कि अक्सर उदास होता है
देखकर कोई फूल हँसता हुआ
क्यूंकि ये आज देख सकता है
सूनी-सूनी उदास सी टहनी
कल नज़र आयेगी जो दुनिया को
सुनके खुशबू सी कोई मस्त हंसी
चंचल आँखों की बात पढ़ते हुए
इसकी पलकों से ओस झरती है
क्यूंकि ये आज समझ सकता है
आज-सा वक़्त कल कहाँ होगा
ये जो शायर उदास बैठा है
दो सदी पहले भी ये ज़िंदा था
तब इसे लोग 'कीट्स' कहते थे
(-जोन कीट्स की याद में)
('एक चुटकी चांदनी' से)
जो कि अक्सर उदास होता है
देखकर कोई फूल हँसता हुआ
क्यूंकि ये आज देख सकता है
सूनी-सूनी उदास सी टहनी
कल नज़र आयेगी जो दुनिया को
सुनके खुशबू सी कोई मस्त हंसी
चंचल आँखों की बात पढ़ते हुए
इसकी पलकों से ओस झरती है
क्यूंकि ये आज समझ सकता है
आज-सा वक़्त कल कहाँ होगा
ये जो शायर उदास बैठा है
दो सदी पहले भी ये ज़िंदा था
तब इसे लोग 'कीट्स' कहते थे
(-जोन कीट्स की याद में)
('एक चुटकी चांदनी' से)
लॉज
जितने सर हैं यहाँ उतने ही हैं दिमाग़ यहाँ
कितनी आज़ादियाँ हैं पैक लॉज में इक साथ
किसी के रेडियो पे चल रहा है मैच कोई
चल रहा है कोई हंगामा साथ केबल पर
तो कोई झूमता आता है वॉकमैन के साथ
किसे है होश के कोई उदास भी है यहाँ !
(-'एक चुटकी चाँदनी' में से )
कितनी आज़ादियाँ हैं पैक लॉज में इक साथ
किसी के रेडियो पे चल रहा है मैच कोई
चल रहा है कोई हंगामा साथ केबल पर
तो कोई झूमता आता है वॉकमैन के साथ
किसे है होश के कोई उदास भी है यहाँ !
(-'एक चुटकी चाँदनी' में से )
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